क्या यह बजट सुधार पायेगा किसानों की दुर्दशा ?

Updated: May 30, 2025
क्या यह बजट सुधार पायेगा किसानों की दुर्दशा ?
बजट मात्र आय व्यय का लेखा संबंधी दस्तावेज नहीं होता बल्कि यह आर्थिक अवस्था की वर्तमान दशा और भविष्य के लिये दिशा दिखाने वाला आइना होता है। अभी देश में 2 बजट प्रकाश में आये - रेलवे और केन्द्र सरकार की आय का वार्षिक बजट। इन दोनों बजटों में एक बात स्पष्ट झलक रही है कि देश की अर्थव्यवस्था की दिशा में परिवर्तन की जरूरत है। रेलवे बजट को प्रस्तुत करते हुये रेलमंत्री को संसद में भाषण के पैरा 5 में कहना पड़ा है कि विश्व की आर्थिक मंदी के कारण देश की अर्थव्यवस्था के अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मंद प्रगति हो रही है। देश के वार्षिक बजट से संबंधित वित्त मंत्री के संसद के भाषण के पैरा 8 में, विश्व की आर्थिक मंदी और खलबली मचाने की जोखिम बढ़ती जा रही है। विदेशी बाजार कमजोर है इसलिये हमें अब घरेलू मांग और बाजारों पर निर्भर रहना होगा ताकि भारत का विकास धीमा न पड़े।
वर्तमान वार्षिक बजट में खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सरकार का गत वर्षों की तुलना सर्वाधिक बल देना बदलती परिस्थितियों का परिणाम है। चालू वर्ष का वार्षिक बजट 19,78,060 करोड़ रूपये का आंका गया है। जो गत वर्ष के 17,77,477 करोड़ रूपये के बजट से लगभग 2 लाख करोड़ रूपया अधिक है। जिसमें योजना व्यय 5,50,010 करोड़ रूपया और गैर योजना व्यय 14,28,050 करोड़ रूपया है और गैर योजना व्यय में सबसे बड़ी व्यय की मद कर्ज और उस पर ब्याज की अदायगी है जो 7,77,364 करोड़ रूपया है जो गत दो वर्षों में 6,09,961 करोड़ रूपया से लगातार बढ़ती जा रही है। देश में कृषि और किसान कल्याण के लिये कुल आबंटन 35,984 करोड़ रूपया है।
सरकार ने देश में किसानों की आय वर्तमान आय से दोगुना करने की समय सीमा 2022 तय की है यद्यपि वर्तमान सरकार का कार्यकाल 2019 तक ही तय है। सरकार ने कृषि के विकास और विस्तार के लिये 9 विशेष स्तम्भ निश्चित किये हैं-
1. किसानों की आय दोगुना करना
2. ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार और अवसंरचना सृजन करना
3. सामाजिक क्षेत्र में सहायता
4. शिक्षा, कौशल, रोजगार सृजन
5. अवसंरचना और निवेश
6. वित्तीय क्षेत्र में सुधार
7. कारोबार करने में आसानी
8. सरकारी वित्त साधनों का विवेकपूर्ण उपयोग
9. कर संबंधी सुधार
खेती को सुधारने के लिये सबसे आवश्यक सिंचाई व्यवस्था को बढ़ाना होगा। प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना इसी सोच की उपज है। देश में 141 मिलियन हेक्टेयर जोत क्षेत्र है जिसमें 46 प्रतिशत सिंचित भूमि है सरकार ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 28.5 लाख हेक्टेयर भूमि अर्थात् 2.8 मि. लि. हेक्टयर भूमि को और सिंचाई क्षेत्र में लाना है। इसके अतिरिक्त किसान को सहायक उद्योगों में प्रोत्साहन और सहायता देने का भी सरकार ने निर्णय किया है। पशुपालन किसान के लिये सबसे सहज और पारम्परिक उद्योग है। सरकार ने चार नयी परियोजनायें शुरू करने का वायदा किया है। पशु संजीवनी जो पशु के स्वास्थ्य के प्रति है। दूसरी उन्नत नस्ल के पशुओं की उपलब्धी तीसरा पशुओं के लिये इलेक्ट्रोनिक बाजार और चैथा देशी प्रजन्न के लिये एक राष्ट्रीय जनोमिक केन्द्र और इसके लिये 850 करोड़ रूपये आबंटन किये गये हैं जो आगामी कुछ वर्षों में परियोजनाओं के क्रियान्वयन होने पर व्यय किये जायेंगे।
देश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिये ग्रामीण विकास पर 2016-17 में 87,765 करोड़ रूपया व्यय करने का तय किया गया है। जिसमें स्कूली शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार सृजन, सड़क निर्माण पर बल देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का स्वप्न दिखाया गया है।
बजट भाषण के पैरा 52 में देश की चिकित्सा व्यवस्था पर नजर डाली गयी है। कहा गया है कि इस चिकित्सा व्यवस्था के कारण देश में प्रति वर्ष लाखों परिवार गरीबी की रेखा के नीचे आते जा रहे हैं। इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिये नई स्वास्थ्य सुरक्षा स्कीम शुरू की जायेगी जिसके तहत एक लाख रूपये तक की सहायता संभव हो पायेगी तथा वरिष्ठ नागरिकों के लिये अलग योजना के तहत 30,000 रूपये तक की सहायता गारंटी की गयी है। यहां एक बात उल्लेख करना आवश्यक है कि भाषण की अगली पंक्तियों में सरकार द्वारा स्वीकार किया गया है कि केवल डाइलैसेंस का खर्चा देश में प्रति वर्ष का 3 लाख रूपये से अधिक है। और देश में प्रति वर्ष 2-2 लाख रोगी इसके बढ़ रहे हैं और कुल मांग 3.4 करोड़ डाइलेसिज सत्रों की हो चुकी है किन्तु इस मांग को पूरा करने के लिये डाइलेसिंग केन्द्रों की कमी है।
देश में गत वर्षों से आर्थिक व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण और उसके विस्तार के लिये अवसंरचना का निर्माण अति आवश्यक माना जाता रहा है। 2016-2017 के बजट में परिवहन अवसंरचना के विकास और विस्तार के लिये कुल 2,21,246 करोड़ रूपया आबंटित किया गया है जिसमें राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के लिये 70,000 करोड़ रूपया और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के लिये 19000 करोड़ रूपया जिससे लगभग 2 लाख कि.मीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण होगा। यहां यह उल्लेख करना आवश्यक होगा कि देश में आज भी 60 प्रतिशत से अधिक आबादी 6 लाख से अधिक गांवों में वास करती है। मात्र 2 लाख कि. मीटर सड़क का निर्माण 6 लाख गांवों के देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में कितनी सहायक होगी?
किसान की आय 2022 तक दोगुनी करने का लक्ष्य सरकार ने निर्धारित करके घोषणा तो कर दी पर इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये जो गंभीरता और जवाबदेही चाहिये उसके अभाव में गत दिनों बजट आने के बाद सबसे अधिक आलोचना बजट के इसी भाग की हुई है। सरकार का विश्वास किसान को हो, देश को हो, समाज को हो , यह बात आवश्यक है। और इसके लिये सरकार को ही अपनी योजनाओं की व्यवहारिकता और प्रमाणिकता पर विश्वास जमाना होगा। परंतु अभी तक जो कुछ बजट में या उसके सम्बंध में दस्तावेजों द्वारा प्रकाश में लाया गया है वह विश्वास भरोसा करने के लिये पर्याप्त नहीं। सामान्य व्यक्ति तो 70 वर्षों में जो अभी तक भरोसों और आश्वासनों पर जीवित रहा है अभी भी इस कृषि और किसान कल्याण के बजट को उसी पुरानी मनोवृत्ति से देख रहा है।




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