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धार्मिक भावनाओं से खेलना बंद करे इलैक्ट्रोनिक मीडिया

Writer: शरद गोयल
शरद गोयल
Jul 4, 2024
3 min read

Updated: May 30, 2025


कई दिनों से देश के एक प्रसिद्ध टी.वी. चैनल पर यह विवाद चल रहा है कि शनि महाराज कोई देवता न होकर एक ग्रह हैं और उस वार्ता में भाग लेने वाले साधु संत और मठाधीश जिस प्रकार की चर्चा व विवाद कर रहे हैं उसको देखकर व सुनकर आम हिन्दू, धर्म व धर्म के ठेकेदारों से डरेगा। मुझे याद है यह वही चैनल है जिस पर कुछ दिन पहले यह चर्चा हो रही थी कि सांई बाबा हिन्दू थे या मुसलमान, सूफी संत थे या भगवान और उस समय भी चर्चा में भाग लेने वाले सभी हिन्दू धर्मगुरू व मठाधीश थे। सबसे पहले तो यह बात सामने आती है कि इस तरह के चैनलों को सरकार ने न्यूज चैनल का लाइसेंस दिया है और यह इस देश का दुर्भाग्य है कि यह न्यूज चैनल व्यूज चैनल में परिवर्तित हो गये हैं। यही नहीं पिछले दिनों एक हिन्दू साध्वी राधे मां को जिस प्रकार हास्य का जरिया बनाकर इन तथाकथित चैनलों द्वारा देश में प्रस्तुत किया गया उससे यह संदेह होता है कि यह सभी चैनल हिन्दू धर्म के खिलाफ एक सोची समझी साजिश के तहत काम कर रहे हैं। और खासतौर से इलेक्ट्रोनिक मीडिया का भय प्रशासन हो या सरकार न्यायपालिका हो या कार्यपालिका सभी के मन में बैठ गया है, कि जिनको यदि मैं ‘‘बदतमीजी’’ कहूं तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। मोदी सरकार जो कि सामान्य जन के लिये एक हिन्दू धर्म समर्थक की छवि के रूप में बदनाम हो रही है, वह भी इस मीडिया की साजिश से अनभिज्ञ है या किन्हीं कारणोंवश इनके खिलाफ कार्यवाही करने में अपने आपको असहाय समझ रही है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की सहयोग संस्थायें, हिन्दू जागृति मंच, बजरंग दल और अपने आपको हिन्दूओं की सबसे बड़ी हितैषी मानने वाली पार्टी शिव सेना भी मीडिया के सामने अपने आपको अपाहिज समझती है। हिन्दू धर्म के खिलाफ टी.वी. पर कुछ भी दिखाया जाता है, किसी का कोई बयान नहीं आता है और आपकी कोई गल्त खबर न दिखा दे यह डर सदैव बना रहता है। मुझे क्या किसी को भी ऐसा नहीं लगता कि किसी और धर्म का इस तरह से आयोजन किया गया हो। कभी-कभी तो इनकी सोच पर रोना आता है कि प्राइम टाइम पर यह सवा सौ करोड़ भारतियों को या कहें सौ करोड़ हिन्दूओं को उनके देवी-देवताओं और ग्रहों के बारे में भिन्न-भिन्न प्रकार की अभद्र टिप्पणियां कर रहे हैं। मुझे संदेह ही नहीं पूरा विश्वास है कि अन्य धर्मों के द्वारा इस तरह के टी.वी. चैनलों की फण्डिंग होती है जो कि हिन्दू धर्म के खिलाफ प्रचार करने का कार्यक्रम कर रहे हैं। फिल्मों में हिन्दू धर्म के खिलाफ जितनी अभद्र व अप्रिय बातें दिखायी जाती हैं, वह हिन्दू आए दिन देखते हैं और उस पर ताली बजाते हैं। दरअसल हिन्दूओं का एक बहुत बड़ा वर्ग जो अपने को पढ़ा लिखा कहता है, वह पढ़ा लिखा होने के साथ अपने को सेकुलर प्रस्तुत करता है और दिखाता है कि वह धर्म से ऊपर है और बाकी हिन्दूओं में से कुछ जैन हो गये, कुछ सांई बाबा के भक्त, कुछ आर्यसमाजी हो गये, एक बहुत बड़ा वर्ग ब्रह्मकुमारी, निरंकारी , राधास्वामी, डेरा सच्चा सौदा, आसाराम बापू इत्यादि न जाने कितने मठों और तवकों में बंट गये जिनके मठाधीश देवी-देवताओं की पूजा से ज्यादा अपने आपको महिमा मंडित करने में लगे हैं। न्यूज चैनल ही नहीं बहुत से विज्ञापन जिनमें हिन्दू ऋषि-मुनियों के भेष में अण्डरगारमेंट बेच रहा है। नारद ऋषि के रूप में विज्ञापनों का आयोजन किया जा रहा है। अभी हाल ही में विज्ञापन देखा प्लाईवुड कंपनी के विज्ञापन में वैदिक मंत्रोच्चारण चल रहे हैं। आखिर यह कैसी मानसिकता है और फिर हिन्दू धर्मों पर यह आरोप कि वह इंटोलरेंस हैं। मुझे याद है कि टी.वी. सीरियल चाणक्य दिखाया जाता है क्योंकि उस सीरियल में भगवा ध्वज व हिन्दू संस्कृति का प्रचार-प्रसार किया गया था। इसलिये धारावाहिक को अंत समय तक नहीं पहुंचने दिया गया व अन्तिम प्रसारण में तो उनमें कोई भी प्रयोजक नहीं रहा। सभी ने उसमें विज्ञापन देने से मना कर दिया परिणाम स्वरूप निर्माता को समय से पहले ही उसको बंद करना पड़ा। सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिये जिसके तहत धार्मिक भावनायें, चिन्ह व धर्म से संबंधित चीजों से छेड़छाड़ करने वाले चाहे कितने भी शक्तिशाली हों, उनको जीरो टोलरेंस पर रखा जाये। चाहे वह किसी भी धर्म से संबंधित हो। न्यूज चैनलों के खिलाफ दब्बू रवैया न रखें। यदि कोई न्यूज चैनल देश की धार्मिकता, अखण्डता व धर्म निरपेक्षता से छेड़छाछ़ करने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की जाये चाहे वह कितना ही शक्तिशाली चैनल हो।

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