नेशनल हरेड़ केस’’ हंगामा है क्यों बरपा

Updated: May 30, 2025
नेशनल हरेड़ केस’’ हंगामा है क्यों बरपा
नेशनल हरेड़ मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व उनके पुत्र राहुल गांधी आज आखिरकार दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में हाजिर हुए और पचास हजार, पचास हजार रुपये के मुचलको पर दोनों को बेल मिल गयी। इस सारे प्रकरण में एक बात जो मेरे गले से नही उतर रही कि इतनी छोटी व सामान्य प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस इतनी संवेदशील क्यों हो गयी यह कोई पहला मौका नहीं था जब कोई राजनेता या कहें कांगे्रस नेता किसी भ्रष्टाचार के मामले में अदालत में पेश हुआ हो। पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इन्द्रा गँाधी व नरसिम्हा राव भी इसी प्रकार अपने उपर लगे मुकदमों में अदालतों में जाते रहे और उस समय न तो पार्टी ने और न मीडिया ने इतना ज्यादा महिमा मण्डित किया। कानून के विशेषज्ञों की बातें तो छोड़ो एक सामान्य सी सोंच रखने वाला व्यक्ति भी देश के कानून की इस व्यवस्था को भलीभाँति जानता है कि यदि कोई व्यक्ति सबूतों सहित किसी भी व्यक्ति पर भ्रष्टाचार या कोई भी आरोप लगाता है और अदालत यह मानती है कि शिकायतकर्ता द्वारा दिये गये सबूत आरोपी पर आरोप सिद्ध करने के लिए काफी हैं तो अदालत उसको अपने यहां बुलाने के लिए सम्मन देती है और सबूतों व बहस के आधार पर यह तय किया जाता है कि आरोपी है या नहीं इतनी आसान सी प्रक्रिया को इतनी जटिल बनाकर कांग्रेस को क्या हांसिल हुआ। मुझे लगता है कि कांगे्रस को कोई राजनैतिक फायदा तो नही मिला अपितु दिल्ली के कई हजार लोग इस प्रकरण को व्यवस्थित करने में परेशान हुए। उन्होंने कांग्रेस को अवश्य कोसा होगा। टी0वी0 चैनलों के माध्यम से पता लगा कि दिल्ली ही नहीं देश में कई जगहों पर प्रधानमंत्री मोदी के पुतले फूंके और बड़ी मात्रा में प्रदर्शन किये। कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कोर्ट से बाहर निकलकर सीधे-सीधे प्रधानमंत्री पर आरोप लगाया कि वह सरकारी तंत्र का दुरूपयोग राजनैतिक कारणों के लिए कर रहे हैं, यहां पर सरकारी तंत्र का मतलब न्यायपालिका है। क्या ऐसा कहकर उन्होंने न्यायपालिका का अपमान नहीं किया। कांग्रेस ने जिस प्रकार से प्रदर्शन किया उससे लगता था मानों कांग्रेस के ये नेता किसी आजादी के समय क्रांतिकारी की तरह देश को गुलामी से छुड़ाने के लिए जेल भरो आन्दोलन के लिए जा रहे हों पर इस सारे प्रकरण में एक बात तो समझ में आ गयी कि कांग्रेस के सभी नेता सोनिया व राहुल के बिना कांग्रेस को आज भी अनाथ मानते हैं। कितनी शर्म की बात है कि लगभग 135 साल पुरानी कांग्रेस जिसने देश में इतने महान नेताओं को जन्म दिया आज वह एक विदेशी महिला व एक अपरिपक्व बालक तक सिमट कर रह गयी है कभी-कभी मुझे लगता है कि कांग्रेस के इतने विद्वान व पढ़े लिखे नेता इस डर से इस परिवार से मोह नहीं छोड़ रहे कि इस परिवार के बाद कांग्रेस के दर्जनों दावेदार अध्यक्ष खेड़े हो जायेंगे जहां तक सवाल है सुब्रामणियम स्वामी का वह बेवाक ओर स्पष्ट बात करने के लिए जाने जाते हैं ऐसा नहीं कि उन्होंने बी0जे0पी0 के नेताओं के बारे में न कहा हो अभी हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल द्वारा वित्तमंत्री अरूण जेटली पर डी0डी0सी0ए0 के संदर्भ में भ्रष्टाचार के जो आरोप लगाये तब सुब्रामणियम स्वामी का वक्तव्य था कि यदि अरविन्द केजरीवाल के आरोप सही हैं तो अरूण जेटली के खिलाफ कार्यवाही की जाये बहुत से मौंकों पर स्वामी ने भारतीय जनता पार्टी की भी आलोचना की है। पूरे प्रकरण की यदि जानकारी लें तो एक बात बड़े अचम्भे की आती है कि कांग्रेस के किसी भी नेता द्वारा स्वामी द्वारा लगाये गये आरोपों का सिलसिलेवार खण्डन नहीं किया गया। स्वामी के आरोपों पर सभी ने एक ही टिप्पणी की कि वह कार्यवाही राजनीति से प्रेरित है व बदले की भावना से की जा रही हैं यदि इस केस में सब कुछ ठीक ठाक है तो कांग्रेस को सबूतों सहित मीडिया को अपनी सफाई देनी चाहिए थी जोकि नहीं दी, कांग्रेसी नेताओं को संयम में रहकर अदालत का सम्मान करते हुए बिना ताम-झाम के अदालत में हाजिर होना चाहिए था और अदालत की कार्यवाही में सहयोग करना चहिए था, इससे आम जनता में कांगेस जनो व कानून के प्रति आम जनता की श्रद्धा व विश्वास बड़ता पर आजादी के 66 साल में से लगभग 60 साल राज करने वाली कांग्रेस शायद विपक्ष में बैठना वरदास्त नहीं कर पा रही है।
शरद गोयल




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