top of page
logo.jpg
  • Facebook

शीघ्र बने गरीन गुड़गांव आथोरिटी

Writer: शरद गोयल
शरद गोयल
Jan 1, 2023
4 min read

Updated: May 30, 2025

शीघ्र बने गरीन गुड़गांव आथोरिटी


पिछले 15 वर्षोें में गुड़गांव ने जिस प्रकार से भौतिक विकास किया है उसने देश को ही नहीं अपितु पूरे विश्व को अपनी ओर आकर्षक किया है, इसमें कोई दोराह नहीं है कि इसमें गुड़गांव का अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से सबसे नजदीक होना बहुत सहायक सि˜ हुआ है। सन 2000 के आस-पास शुरू हुई इस विकास की गति की दौड़ में सब कुछ आगे निकल गया अगर पीछे रह गया तो गुड़गांव का पर्यावरण, सब कुछ ऊपर हो गया, नीचा हुआ तो गुड़गांव का भू-जल। दरअसल इन 15 वर्षों में जो कुछ हुआ उसे मैं विकास कम मानता हूं , लूट ज्यादा मानता हूं क्योंकि अगर पर्यावरण व भू-जल की ओर भौतिक मूल्यों की कीमत दे कर किसी जगह पर विकास होता है तो मेरे अपने शब्दों में वह उस जगह का विकास नहीं अपितु बलात्कार है और इस गुड़गांव का तो लगता है सामूहिक बलात्कार हुआ हो। जो छोटा सा शहर मात्र 3 आई ़ए ़एस ़, आई ़पी ़एस ़अधिकारियों के द्वारा संभाला जाता था, उसको संभालने में लगभग 30 आई ़ए ़एस ़, आई ़पी ़एस ़और एच ़सी ़एस ़ अधिकारी लगे हुए हैं। मैं इस लेख में अपने दर्द को मात्र पर्यावरण तक ही सीमित रखना चाहता हूं। इन 15 वर्षों के दौरान गगन चुम्बी इमारतें जिस प्रकार गुड़गांव की जमीन में उग आईं, उसी गति से यहां पर बड़ी मात्रा में पर्यावरण के साथ खिलवाड़ किया गया। वृक्षों की कटाई की गई और हर वह काम किया गया जिससे भू-जल की उपलब्धि कम हो जाए और उसकी गुणवत्ता खराब हो जाए।

जहां तक सवाल वृक्षों का है, एक वृक्ष को लगाने पर वो लगभग 7-8 साल में बड़ा वृक्ष बनता है और उसको काटने में शायद 70 मिन्ट भी नहीं लगते, इसी प्रकार यदि उस वृक्ष को काटा भी न जाए और उसकी देख-रेख बंद कर दी जाए तो भी उसे मरने में 7-8 दिन से ज्यादा नहीं लगते। ऐसे सैंकड़ों उदाहरण 24 घंटे हम लोगों के सामने आते हैं जिसमें किसी व्यक्ति विशेष या विभाग विशेष की लापरवाही से 10 से 15 साल वर्ष पुराना वृक्ष 10-15 दिन में मर गया। दरअसल सरकार का जो भी विभाग गरीन बेल्ट में लगे इस प्रकार के वृक्षों की देख-रेख करता है वह सबसे कम ऊपर की कमाई वाला विभाग होता होगा जिसमें नियुक्त कर्मचारी व अधिकारीगण या तो बेमन से काम करते हैं या उच्च अधिकारियों के घरों में गमले व सब्जी लगाने का काम करते हैं। वरना कोई कारण नहीं कि इंडिया बुल्स के सामन,े राष्ट्रीय राजमार्ग के सामने लगे गरीन बेल्ट पर 500 से अधिक वृक्षों को काटकर पार्किंग में बदल दिया गया और सरकार द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई। यदि कोई योजना उस स्थान पर थी तो पेड़ कटे होेने के लगभग 2 साल हो गए हैं लेकिन योजना अभी शुरू क्यों नहीं हुई ? पूरे शहर में किसी भी स्थान पर हम जाएं गरीन बेल्ट को बचाया नहीं गया है फिर चाहे वो रेल्वे रोड पर सैक्टर-4 का क्षेत्र हो, हाईवे हो, सैक्टर-14 से लगा महरौली रोड व महाराणा प्रताप चैक से अतुल कटारिया चैक हो , कितने उदाहरण दूं मैं आपको कि वृक्षों की जड़ में गरीन बेल्ट में पत्थर और सीमेंट का मल्बा डाल दिया जाता है और कुछ ही महीने बाद वह मर जाता है। दरअसल मैं दावे से कह सकता हूं कि गुड़गांव के अधिकारी और गुड़गांव के नागरिक जितने पेड़ों की सुरक्षा के बारे में गैर जिम्मेदार और असंवेदनशील हैं उतना ही कहीं ओर के नागरिक व अधिकारी होंगें। दरअसल यहां का हर इंसान, हर नागरिक एक अंधी दौड़ में भाग रहा है, सामाजिक जिम्मेदारी नाम की चीज उसके व्यक्तित्व में नहीं है, तो ऐसे में सरकारों की जिम्मेदारी होती है कि वो वृक्षों की सुरक्षा के लिए सख्त से सख्त कानून बनाएं। सरकार से व इस शहर के कर्णधार व योजनाकारों से मेरी मांग है कि तुरंत प्रभाव से गरीन बेल्ट को चिन्ह हित करें , उनका दीवार व कांटे वाली तारों से बचाव करें व जरूरत समझें तो अनअधिकृत रूप से मल्बा डालने वालों को पकड़ने के लिए रात्रि में गश्त करें और जिस गरीन बेल्ट में मल्बा अधिक डाला हुआ पाया जाता है उसका पता लगाकर वहां पर सीसीटीवी कैमरे का भी प्रबंध करें और इन सबसे ज्यादा आवश्यकता हरियाणा में ट्री प्रोटेक्शन एक्ट बनाने की है। दिल्ली मंे वन संरक्षण अधिनियम 1994 लागू होता है जिसके अंतर्गत यदि कोई सर्वाजनिक पेड़ को काटता हुआ पाया जाता है तो उस पर कम से कम 1 साल की सजा का प्रावधान है। जबकि हरियाणा में इस प्रकार का कोई कानून नहीं है और हरियाणा राज्य में पंजाब अधिनियम भूमि संरक्षक 1900 की धारा 4 लागू है जो कि वृक्षों के लिए बनी ही नहीं बल्कि भू-जल के संरक्षण के लिए बनी है। जिसके तहत बड़े से बड़ा वृक्ष काटने पर मात्र 500 रूपये का जुर्माना होता है । किसी बड़ी सजा के खौफ न होने के कारण ही हरियाणा में खास तौर से गुड़गांव में पेड़ों की यह दुर्दशा हैै। सरकार को चाहिए कि दिल्ली की तर्ज पर दिल्ली से भी सख्त कानून बनाया जाए क्योंकि दिल्ली में हजारों एकड़ का क्षेत्र रिज़ के नाम पर पहले ही संरक्षित है और वह दिल्ली के गरीन संतुलन को बनाए हुए है। हरियाणा में दिल्ली से कहीं और बहुत सख्त कानून की आवश्यकता है क्योंकि पिछले 15 वर्षों में गुड़गाांव में बहुत सारी मल्टीपल एजेंसीस काम कर रहीं हैं और उनमें आपस में समन्वय का अभाव भी रोजाना आम नागरिक को झेलना पड़ता है। इसलिए सभी विभागों के बागवानी विभाग को इकट्ठा करके एक गुड़गांव गरीन आॅॅथोरिटी बनाई जाए। जिसमें सभी विभागों के बागवानी विभाग के लोग डेपुटेशन पर आएं और एक मुख्य अभियंता स्तर का व्यक्ति गुड़गाांव में सिर्फ गरीनरी का काम देखे। किसी भी विभाग द्वारा पौधे लगाए जाएं लेकिन रख-रखाव की जिम्मेदारी इस आॅॅथोरिटी की हो। इस आॅॅथोरिटी को अति आधुनिक उपकरणों से कम किया जाना चाहिए, इस आॅॅथोरिटी के पास तकनीकी जानकारी रखने वाले विशेषज्ञ भी हों और उपयुक्त मात्रा में कोष भी इस आॅॅथोरिटी के पास होने चाहिएं। इतना ही नहीं यदि पूरे शहर में कोई वृक्ष किसी व्यक्ति विशेष की लापरवाही से मारा जाता है तो इस एजेंसी को अधिकार हो कि उसके खिलाफ एफ ़आई ़आर ़ दर्ज करा दंे। दूसरी ओर यदि शहर मंे कहीं भी कोई वृक्ष मरता है , किसी भी नागरिक को यह अधिकार हो कि किस आॅॅथोरिटी के विरू˜ लापरवाही का मुकदमा दर्ज करा दें। साथ-साथ आम नागरिकों को भी यह समझना होगा कि हमारा जीवन जितना महत्वपूर्ण है उससे कई ज्यादा वृक्षों का जीवन महत्वपूर्ण है।

Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page