top of page
logo.jpg
  • Facebook

सरकारे क्यों दे नौकरियां

Writer: शरद गोयल
शरद गोयल
Dec 14, 2024
1 min read

Updated: May 30, 2025

“सरकारी नौकरी” हिंदुस्तान में यह शब्द जैसे एक बहुत बड़े वर्ग का जीवन पर्यन्त सपना होता है I युवा ने यदि दसवीं तक पढ़ाई कर ली तो आम नागरिक सरकार से यह उम्मीद करने लग जाता है कि अब वह नौकरी के हकदार हो गए हैं  I और सरकार हमें नौकरी देने के लिए बाध्य है। मुझे लगता है कि 140 करोड़ की जनसंख्या वाले ऐसे देश में जिसमें युवाओं की तादाद विश्व में सबसे ज्यादा है, आमजन को बेवकूफ बनाने के लिए रोजगार से ज्यादा प्रभावशाली नारा नहीं हो सकता, और लोगों की इसी कमी को राजनीति दलों ने अपना मोहरा बनाया हुआ है।  छोटे-छोटे राज्यों में जब चुनाव होते हैं तो वहां के क्षेत्रीय दल भी यह वादा करते हैं कि हम इतने लाख लोगों को रोजगार देंगे। यहीं से भ्रष्टाचार का जमावड़ा शुरू होता है I पहली बात तो उतनी नौकरियां है नही, जितनी कि वहां पर वादा किया जाता हैं, यदि थोड़ी बहुत नौकरियां होती भी हैं तो पूर्ण रूप से अपने राजनीतिक फायदे के लिए भरते हैं। राज्य सरकार द्वारा की गई भर्तियों में बड़े-बड़े भ्रष्टाचार के कांड समय-समय पर सामने आते रहते हैं, फिर चाहे वह शिक्षक भर्ती कांड हो, चाहे सिपाहियों की भर्ती का मामला हो, चाहे क्लास 4 की भर्ती का मामला हो या अन्य। राजनीतिक दलों ने अपने राजनीतिक हित साधने के लिए भर्ती प्रक्रिया को पूर्ण प्रमाणित नही बनाया हुआ है, जबकि  केंद्र  सरकार  की  नौकरियों  में  इस  तरह की शिकायतें न के बराबर आती हैं।


 अब बड़ा सवाल यह आता है कि युवाओं को नौकरी देने का दायित्व सरकारों का है ? मेरे दृष्टिकोण से सरकारों का दायित्व युवाओं को नौकरी देने का नहीं है, अपितु देश में एक ऐसा वातावरण बनाने का है, जिसमे हर वर्ग , क्षेत्र , जाति , उम्र  और शिक्षा के आधार पर युवा अपने खुद का रोजगार बनाएं I व्यवसाय के माध्यम से,  उद्योगों के माध्यम से, खेती के माध्यम से व अन्य हजारों माध्यम से वह अपने आपको इस लायक बनाए की दूसरों को रोजगार दें सकें । मेरा मानना है कि सरकार से रोजगार वे लोग मांगते हैं, जिनमे कार्य करने की क्षमता नहीं होती और कम से कम जिम्मेदारी में आराम की जिंदगी गुजारना चाहते हैं। यही कारण है कि चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों को भरने के लिए जो आवेदन आते हैं, उनमें एम.ए और कभी-कभी तो पीएचडी के युवा आवेदन भर देते हैं, क्योंकि उनको लगता है कि अगर सरकारी नौकरी एक बार मिल गई तो जीवन भर काम नहीं करना पड़ेगा I यहाँ पर उल्लेखनीय है कि मैं सरकारी नौकरी का जिक्र यूपीएससी, मिलिट्री ,पैरामिलिट्री स्तर की नौकरियों की बात नहीं कर रहा हूं।

  सरकारों को चाहिए कि बेरोजगारी को इलेक्शन का टूल किट बनाने की बजाए देश में लघु व कुटीर उद्योगों का जाल फैलाए I स्किल डेवलपमेंट के कार्य को और मुस्तेदी से चलाएं I  युवाओं को रोजगार की जगह पर  कारोबार  और व्यवसाय स्थापित करने में उनकी मदद करें। उधोग लगाने के लिए सस्ते दामों पर प्लाट दे I ब्याज मुक्त ऋण की जरूरत को पूरी करें। सरकारी तंत्र को इस बात के लिए तैयार करें वह युवाओं को न केवल व्यवसाय और कारोबार लगाने के लिए प्रोत्साहित करें, अपितु उनकी इस कार्य में मदद भी करें। उसके लिए सरकार की जो योजनाएं हैं, उसे बड़े स्तर पर लागू करने की आवश्यकता है। कॉरपोरेट मूवमेंट को देश के कोने-कोने में फैलाने की आवश्यकता है। लघु व कुटीर उद्योगों का देश में जाल फैलाने की आवश्यकता है। सरकारों का दायित्व है कि वह देश में एक ऐसा माहौल बनाएं जिसमें गरीब से गरीब और पिछड़े क्षेत्र का युवा व्यवसायी ,उद्योगपति व कारोबारी बनने का सपना ले ,न की सरकारी नौकरी करने का। युवा को यह समझना होगा कि उनको नौकरी देने में किसी सरकार की कोई रुचि नहीं है I सरकारों की रुचि नौकरियों की दिलासा देकर उसे मात्र वोट हासिल करना है।

Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page