“सत्य निकेतन हादसा” पूरी व्यवस्था पर सवाल
दिल्ली के सत्य निकेतन में एक पुराने भवन के ढह जाने से सात नौजवानों की जीवन लीला समाप्त हो गई। सरकार और प्रशासन इस समस्या की ओर गंभीर होने का दिखावा भी कर रही है जबकि यह सर्वव्यापी है कि जब मीडिया इस खबर को दिखाना बंद कर देगा तब प्रशासन बिल्कुल शांत होकर के और किसी कार्य में लग जाएगा। बारिश के बंद होते ही प्रदूषण की समस्या होने वाली है उस समस्या के समाधान के लिए नाटकबाजी शुरू हो जाएगी और इस हादसे को सब भूल जाएंगे। अभी दो साल पहले की बात है 27 जुलाई 2024 को अचानक तेज बारिश आने से दिल्ली के राजेन्द्र नगर स्थित एक UPSC के कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में अचानक पानी भरने से तीन होनहार युवा छात्रों की मृत्यु हो गई थी। उन छात्रों के परिवारों के अलावा आज वो हादसा किसी अन्य को याद भी नही है। इसी प्रकार कुछ दिन बाद यह हादसा भी लोग-बाग भूल जाएंगे। आंकड़ों की बात करें तो दिल्ली में हर साल पुरानी बिल्डिंग ढह जाने से पचास से अधिक मारे जाते है। कल के हादसे के बाद पहली बार प्रशासन ने किसी उच्च अधिकारी को सस्पेंड किया है। धरातल पर इसका असर होने की सम्भावना बहुत कम है किन्तु दिल्ली की मुख्यमंत्री महोदया ने एक और आदेश दिया कि दस साल से पुरानी बिल्डिंग को STRUCTURE CERTIFICATE देना पड़ेगा। अर्थात भवन मालिकों के लिए एक ओर नई कानूनी औपचारिकता है जिससे होना जाना कुछ नहीं किन्तु आम नागरिकों के लिए सरकारी विभागों के चक्कर काटने का एक और कारण हो जाएगा। देखते है इस पूरे आदेश में कौन से नए प्रपंच होने वाले है उनकी चर्चा तभी की जाएगी।
दरअसल सरकार ने कभी यह सर्वे नहीं करवाया कि दिल्ली में देश के विभिन्न भागों से कितने लोग शिक्षा ग्रहण करने आते है। चाहे वो कॉलेज की शिक्षा हो या कोचिंग की शिक्षा हो I जरुरत है इनका सर्वे करके इन सभी के लिए सरकारी आवास का प्रबंध कराया जाए जोकि बहुत ही सस्ते दाम पर हो। पी.जी. में रहने वाले बच्चे अत्यंत दयनीय स्थिति में जीवन गुजारते है, ख़राब खाना खाते है और इन सबके लिए महंगी कीमत अदा करते है। इतना ही नहीं, दिल्ली के बड़े सरकारी अस्पतालों के सामने हजारों लोग फुटपाथों पर सोने के लिए मजबूर होते है। देश की शान "अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान" (AIIMS) के सामने रात को 12 बजे के आस-पास निकले तो सैकड़ों की तादाद में लोग-बाग़ फुटपाथ पर सोए हुए मिलते है। सर्दियों में तो आलम यहाँ तक भी हो जाता है कि अंडरपास को रोक कर लोग-बाग़ उसके नीचे सो जाते है। भगवान ना करे कभी कोई हादसा हो जिसकी ये प्रशासन सदा इन्तजार में रहता है। उस हादसे के बाद इस ओर प्रशासन का ध्यान जाएगा और तब कोई नई नाटकबाजी होगी। दरअसल दिल्ली को बर्बाद करने में सबसे बड़ा योगदान MCD का है। भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा अड्डा यह संस्था है। किसी भी हादसे के बाद इस संस्था के कर्मचारी आमजन को परेशान करने का नया कोई कारण ढूंढ लेते है और समस्या वही की वही रहती है।
आवश्यकता है दिल्ली में एक बड़ा सर्वे करके इस प्रकार के भवनों को चिन्हित किया जाए और समयबद्ध तरीके से उनके पुनःनिर्माण की योजना बनाई जाए। छात्रों के लिए बड़े-बड़े छात्रावास बने चाहे उनके निजी क्षेत्र में बनाया जाए I उसके लिए सरकार सस्ते दामों पर जमीन मुहैया कराए और छात्रों से वसूल किए जाने वाले किराए को फिक्स करे। सभी बड़े सरकारी अस्पतालों में मरीजों व उनके साथी का रहने के प्रबंध किया जाए। इसी प्रकार बस अड्डा, रेलवे स्टेशन आदि पर भी बड़ी मात्रा में रैन बसेरों का निर्माण किया जाए और उनका संचालन निजी क्षेत्रों के हाथों में दिया जाए अन्यथा इस प्रकार की घटनाएँ होती रहेंगी और प्रशासन लिपा-पोती करता रहेगा। ऐसी घटनाओं की पुनरावृति न हो उसके लिए स्थाई कदम उठाने होंगे।




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