आखिर कैसे हो गया प्रदुषण सामान्य ?

Updated: May 30, 2025
पिछले कुछ दिनों से सड़कों पर लगे वायु प्रदूषण का स्तर प्रदर्शित करने वाले साइन बोर्ड पर निगाह डली तो आश्चर्यजनक सत्य सामने आया और जहन में बहुत से सवाल भी आ गए कि शहर का AQI लेवल जो तथाकथित प्रदूषण के दिनों में 500-550 पहुँच जाता है वो अचानक 30-32 और गुड कंडीशन में कैसे आ जाता है। आज ही PM 2.5-28 (गुड) और PM 10-72 (सैटिसफैक्ट्री) यहाँ तक की मोबाइल में वातावरण का प्रदूषण लेवल बताने वाली ऐप भी दिल्ली एन सी आर का प्रदूषण भी गुड और सैटिसफैक्ट्री बता रहा है। यह सवाल जहन में बार-बार आ रहा है कि अक्टूबर से मार्च तक का समय जिसमे प्रदूषण अत्यधिक पाया जाता है में ऐसा क्या होता है जबकि अगर दिल्ली एन सी आर की बात करे तो सड़कों पर टू व्हीलर और फोर व्हीलर को मिला ले तो चार सौ से पांच सौ गाड़ियाँ और अधिक सड़कों पर नई आ जाती है यानि आज फरवरी की अपेक्षा हजारों गाड़ियाँ सड़क पर अधिक चल रही है। इससे एक बात तो साबित हो गई कि प्रदूषण का ठिकरा जो सरकारें मोटर वाहनों के सर पर फोडती है वो झूठ है। महज चालान के जरिए करोंड़ों रुपए कमाने का सरकार का यह षडयंत्र है। इसी प्रकार यदि हम डीजल इंधनों की बात करे तो वो भी आज पूरी तरह चल रहे है। क्योंकि किसी प्रकार का प्रतिबंध डीजल इंधनों पर नहीं लगा हुआ।
तीसरा मुद्दा आता है भवन निर्माण का। भवन व अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण का कार्य भी असामान्य रूप से चल रहा है। किन्तु इन सब गतिविधियों के सामान्य रूप से चलने के बावजूद भी शहर का पर्यावरण सामान्य व अच्छी श्रेणी का है।
क्या यह सरकारी एजेंसियां जो करोंड़ों रुपया लोगों से ग्रीन टैक्स व चालान के रूप में वसूलती है उन एजेंसियों के शोध का विषय नहीं है। सामान्य नागरिक को जो समझ में आता है। वर्षा ऋतु के कारण वातावरण में डस्ट आर्टिकल (रेत के कण) कम है इसके कारण पर्यावरण का स्तर संभला हुआ है। तो यह स्पष्ट जाहिर होता है कि वाहनों के चलने से पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता है। इसी प्रकार डीजल के जनरेटर चलने से भी पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता है। अत: सम्बंधित एजेंसियों से अनुरोध है कि इस पर शोध करे और जिन दिनों प्रदूषण अधिक मात्रा में पाया जाता है। उन दिनों आमजन को परेशान करने वाले कदम ना उठाएं।




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