top of page
logo.jpg
  • Facebook

समय है सरकारी तन्त्र को मजबूत करने का

Writer: शरद गोयल
शरद गोयल
Mar 1, 2024
3 min read

Updated: May 30, 2025

पिछले दिनों राजधानी की एक रेडियो टैक्सी में हुयी बलात्कार की वारदात ने एक बार फिर राजधानी ही नहीं बल्कि पूरे देश को हिला कर रख दिया दरअसल बलात्कार जैसी घटनाओं की निन्दा के लिये, किसी भी शब्दकोष के अन्दर कोई शब्द नहीं होते और इस तरह की घटनाओं की निन्दा मात्र शब्दों से की भी नहीं जा सकती, लेकिन दुर्घटना का एक दूसरा पहलू ओर भी है कि इस दुर्घटना के तुरन्त बाद माननीय गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह जी ने तुरंत प्रभाव से उस रेडियो टैक्सी कम्पनी पर रोक लगा दी, जिस कम्पनी की वह गाड़ी थी, जिसमें संबधित वारदात हुयी, यह कम्पनी किसकी थी कौन इसका मालिक था, वह कहां की कम्पनी थी, किस देश की कम्पनी थी, इन सभी सवालों से परे एक सवाल यह उठता है कि बिना सोचे समझे इस तरह का फैसला लेना क्या तुगलकी फरमान से कम नहीं है, और सबसे बड़ी बात तो यह सामने आयी कि जिस सरकार के गृहमंत्री इस तरह का फैसला सुना रहे थे उसी समय उसी सरकार के दूसरे वरिष्ठ मंत्री इस फैसले का विरोध कर रहे थे, मेरा सोचना है कि टैक्सी सर्विस पर रोक लगाना और दूसरे मंत्री द्वारा विरोध-करना, यह सरकार की नीतिगत फैसले की कमी तो है ही, बल्कि इससे अधिक इसके जिम्मेदार मंत्रियों की इलेक्ट्रोनिक मीडिया का कैमरा देखते ही बोलने की मानसिकता जिम्मेदार है, मीडिया कर्मियों का तो यह व्यवसाय है, उनको तो उसी बात का वेतन मिलता है, लेकिन समाज के जिम्मेदार व समृद्ध व्यक्तियों को यह सोचना चाहिये कि हमें मीडिया का कैमरा देखते ही बोलने के बजाय संयम रखना चाहिये और आपस में समन्वय रखना चाहिये, यह कोई पहला मौका नहीं जहां इस तरह का विरोधाभाषी व्यक्तित्व सामने आया हो इससे पहले भी मंत्रियों का विरोधाभाष आता रहा है, मेरा मानना है कि हर मंत्री को कैमरे के सामने बोलने की इजाजत होनी ही नहीं चाहिये, अपितु सरकार की ओर से रोजाना एक तय समय पर सरकार द्वारा अधिकृत व्यक्ति सरकार के नियमों पर प्रेस विज्ञप्ति या काॅफ्रेस करें, जिनमें 24 घंटे में हुये सभी महत्वपूर्ण विषय पर देश को जानकारी अधिकृत तौर पर दी जा सके, यह तो रहा इस घटना का एक पहलू, दूसरा पहलू सम्बन्धित टैक्सी सर्विस पर प्रतिबंध लगना चाहिये या नहीं, मैं व्यक्तिगत तौर पर प्रतिबंध लगाने को बेहद बचकाना हरकत कहूंगा जो कि बिना सोचे समझे की गयी, नितिन गडकरी जी के बयान में यह बात सही थी कि यदि रेल में इस तरह की दुर्घटना होती तो क्या रेल को बंद कर दिया जाता, आज दुनिया में आये दिन साइबर क्राइग्स होते हैं, और इनकी मात्रा इतनी अधिक बढ़ गयी है कि इनको समाप्त करने के विभाग तक बन गये हैं, लेकिन दुनिया के किसी भी देश में इंटरनेट को बैन नहीं किया, क्योंकि यह भी सत्य है कि इंटरनेट का इस्तेमाल आज जीवन रेखा बन गयी है, इसी प्रकार देश में चलने वाली रेडियो कैब कामकाजी लोगों के लिये आने-जाने का सुविधाजनक साधन बना हुआ है, इस तरह के फैसले से कितने लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ेगा, दूसरा आज देश में मात्र इस कम्पनी में ही 10,000 के करीब, प्रत्यक्ष व परोक्ष रुप से काम करते है, उनके रोजगार का क्या होगा, एक आदमी का रोजगार चार आदमियों को रोटी देता है, यह माननीय मंत्री जी ने नहीं सोचा और भविष्य में कोई बड़ी कम्पनी सुविधाजनक यातायात का साधन देश में लाने से पहले कई बार विचार करेंगी, जहां तक सवाल है, ट्रैक्सियों में सुरक्षा के नाम पर सरकार को चाहिये था उस और नये कदम क्या होंगे उस और पहले करती, नयी तकनीक का इस्तेमाल करके सम्बन्धित टैक्सी सर्विस बनें और आधुनिक बनाने का प्रयास करना चाहिये था दरअसल सरकार के आज भी सभी थाने, सभी आर.टी.ए. आॅफिस कम्प्यूटराइज्ड नहीं हुये है। सिक्योरिटी नं0 प्लेट 1 प्रतिशत गाड़ियों में भी नहीं लग पाये है जीपीएस ट्रैकर अभी भी पूरी तरह से टैक्सियों में नहीं लगे है, जहाँ तक सवाल कर्मचारियों के पुलिस बेरिफिकेश बना हाल न ही पूछो तो अच्छा है। आज भी कई कर्मचारी बेरिफिकेश फार्म आते है लेकिन संबंधित गांव या थाने तक पहुँच भी नहीं पाते हैं, अच्छे इन्फ्रास्क्ट्रैसर व सोफ्टवेयर से लैंस पुलिस की आवश्यकता है कर्मचारियों का पुलिस बेरिफिकेशन का तरीका भी कोई आधुनिक नहीं है, सरकार को इन सभी और तय सीमा के अन्दर काम करना होगा यदि वह इस तरह की घटनाओं से संवेदनशील है तो, अन्यथा इस तरह की वारदात होती रहेंगी और मंत्रियों के तुगलकी फरमान आते रहेंगे समस्या का समाधान नहीं निकलेगा, यदि आधुनिक संसाधनों की व्यवस्था होती तो ड्राइवर घर पहुंचने से पहलें गिरफ्तार हो जाता, आवश्यकता है कि अदालतों में जल्द और सख्त फैसले की, टैक्सी सर्विस पर रोक लगाकर हजारों लोगों को बेरोजगार करके इस समस्या का समाधान नहीं निकलेगा।

लेखक विचार परिक्रमा पत्रिका के सम्पादक है,

Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page