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निर्धनता अब तक बोल नहीं पाती थी,अब कुछ कहना चाहती है ।
निर्धनता बहुत आयामी होती है, इसमें केवल मूलभूत आवश्यकताओं की संतुष्टि से ही वंचित नहीं होना पड़ता । बल्कि उसे सामाजिक दृष्टि से उपेक्षा का श

शरद गोयल
Aug 27, 20246 min read
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