विपक्षी या विरोधी
एक सुदृढ़ लोकतांत्रिक व्यवस्था में जितना सत्ता पक्ष का मजबूत होना आवश्यक है उतना ही आवश्यक है एक मजबूत , समझदार व जिम्मेदार पक्ष का होना I आजादी के बाद बहुत सी सरकारें आई , कुछ समय पूरा होने से पहले चली गई और कुछ अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद गई I किंतु सभी में विपक्ष की भूमिका अहम रही I पिछले 10 साल से देश में संपूर्ण विपक्ष , विपक्षी ना होकर सत्तारूढ़ दल का विरोधी हो गया है जिसके कारण देश में एक अजीब सा वातावरण पैदा हो गया है I इसको विपक्षियों की बुकलाहट कहे या और कुछ I मैं कोई राजनीतिक विश्लेषक नहीं हूं किंतु एक आम जागरूक नागरिक होने के नाते मैंने यह महसूस किया है I 2025 में जो लोकसभा बनी उसमें तो विपक्षियों को विरोधी कहकर बुलाना ही उचित होगा I संसद के मानसून सत्र में तो अजीबो गरीब माहौल सामने आया I सत्ता पक्ष का कोई भी व्यक्ति चाहे वह माननीय प्रधानमंत्री हो ,मंत्री हो या सांसद , उनका वक्तव्य पूरा होने से पहले ही विपक्षी हो-हल्ला करने लगते थे I
कुछ बानगी के तौर पर पहलगांव हमले के बाद सरकार ने एक्शन क्यों नहीं लिया ? इस पर हंगामा, एक्शन लिया इस पर हंगामा , एक्शन रोक दिया इस पर भी हंगामा I मेरे दृष्टिकोण से पाकिस्तान के विरुद्ध CEASEFIRE बहुत ही समझदारी भरा कदम था I भारत का इस पूरे ऑपरेशन सिंदूर में न्यूनतम नुकसान हुआ I इसमें कतई संदेह नहीं है कि भारतीय सेना पाकिस्तान को बहुत ज्यादा नुकसान भी पहुंचा सकती थी I यदि भारतीय सेना पाकिस्तान के 2000 सैनिक मार देती तो भारत के भी 200 सैनिक मारे जाते I पूरे ऑपरेशन सिंदूर में भारत का नुकसान पाकिस्तान के मुकाबले बहुत कम हुआ था I किंतु संसद के विरोधियों ने इसका भी विरोध किया और MODI SURRENDER का नारा दिया I कांग्रेस के एक सांसद और पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने तो सारी सीमाएं ही लांघदी और भरी संसद में यह कह डाला कि इस बात का क्या सबूत है कि आतंकवादी पाकिस्तान से आए थे I
इस संसद सत्र के दौरान ही भारतीय जवानों ने उन चार आतंकवादियों को मौत के घाट उतार दिया जिन्होंने पहलगांव की दुर्दांत घटना को अंजाम दिया और 30 के करीब निर्मम लोगों की हत्या की I अब विरोधियों का बयान आया कि यह हत्या आज ही क्यों की गयी I मतलब इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण व शर्मनाक बयान कोई नहीं हो सकता I संसद सत्र खत्म होने के बाद सरकार ने वोटर लिस्ट में अपडेट करने का कार्य किया i देश में लोकतंत्र खत्म हो चुका है केंद्र में तानाशाह सरकार है और सभी बड़ी एजेंसियां केंद्र सरकार के इशारों पर नाच रही है और केंद्र में वोट चोरों की सरकार काबिज़ है I इस प्रकार के जनता के बरगलाने वाले ब्यान विरोधियो ने सुबह शाम देने शुरू कर दिए हालांकि यह सब बिहार के आगामी चुनाव के मद्देनज़र किया जा रहा है विरोधी इस बात को भूल रहे हैं कि अगर केंद्र में तानाशाह सरकार होती तो शायद देश के प्रधानमंत्री को चोर कहने वाले सरेआम सड़कों पर नहीं घूम रहे होते I
देश का विपक्ष , कब विपक्ष से विरोध में बदल गया यह उन्हें खुद नहीं मालूम I लोकतंत्र में विपक्ष का होना अत्यंत आवश्यक है किंतु विरोध , मात्र विरोध के लिए करना , देश को कमजोर करने की साजिश समझा जाता है I
अभी हाल ही की घटना नेपाल से सामने आई जहां पर एक बहुत बड़े वर्ग ने सत्तारूढ़ व्यवस्था को हिंसा पूर्वक प्रदर्शन करने के माध्यम से उखाड़ फेंका I यह वहां की आंतरिक व्यवस्था व् समस्या है I लेकिन भारत में बैठे विरोधियों ने यहां पर भी सरकार विरोधी बयान बाजी शुरू कर दी I शिवसेना के एक वरिष्ठ नेता ने तो यहां तक भी कह डाला कि ऐसा भारत में होने की संभावना है I ऐसा ही कुछ बयान सांसद के एक नेता ने दिया और अपने आप को किसान नेता कहने वाले उत्तर प्रदेश के स्वयंभू किसान नेता पहले भी यह बयान दे चुके हैं कि भारत में भी बांग्लादेश जैसे हालात होने की आशंका है I मैं इन विरोधियों की मानसिकता को एक बीमार मानसिकता ही कहूंगा और मुझे संदेह नहीं पूर्ण विश्वास है कि इस प्रकार के बयान देने वाले लोग विदेशी ताकतों के हाथ में खेल रहे हैं I एक मजबूत लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण है ना कि विरोधियों की I




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